बुधवार, 30 मार्च 2011

एक लम्हे के लिए भी उसे आराम नहीं होता

एक लम्हे के लिए भी उसे आराम नहीं होता
बहुत काम निकल आते हैं जब काम नहीं होता

मुझे शोहरत दिलाने में मेरे दोस्त मशगूल है
बिना उनकी बदौलत मै बदनाम नहीं होता

हारने वाले नवाजे जाते है झूठी तसल्लियों से
जीतने वालो के लिए ये इनाम नहीं होता

अमूमन वक्त एक सा नहीं रहता
जो होता है सुबह वो शाम नहीं होता

सारे वार सहना और किसी से न कहना
इससे बेहतर कोई इंतकाम नहीं होता

हर शख्स में एक शख्सियत होती है
नज़र में मेरी कोई भी शख्स आम नहीं होता

लोग फ़साने बना लेते है तेरे हर बयान पर 'अमित'
शायद इसलिए किस्सा तेरा तमाम नहीं होता

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
ek lamhe ke liye bhi use aaraam nahi hota
bahut kaam nikal aate hai jab kaam nahi hota

mujhe shohrat dilaane me mere dost mashgool hai
bina unki badaulat mai badnaam nahi hota

haarne waale nawaaze jaate hai jhoothi taslliyon se
jeetne waalon ke liye ye inaam nahi hota

ammoman har waqt ek sa nahi hota
jo hota hai subah wahi sham nahi hota

saare waar sahna aur kisi se na kahna
isse behtar koi inteqaam nahi hota

har shaks me ek shakhsiyat hoti hai
meri nazar me koi shakhs aam nahi hota

log fasaane banaa lete hai tere har har bayaan par 'amit'
shaayad isliye kissa tera tamaam nahi hota

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

2 टिप्‍पणियां:

  1. सारे वार सहना और किसी से न कहना
    इससे बेहतर कोई इंतकाम नहीं होता


    ..... वाह...बहुत खूब.... ये तो 'सत्याग्रह' जैसा है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर शख्स में एक शख्सियत होती है
    नज़र में मेरी कोई भी शख्स आम नहीं होता

    Bahut Sundar....

    उत्तर देंहटाएं