मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

कहीं इफरात है तो कहीं कुछ कम है // there could be plenty or less

कहीं इफरात है तो कहीं कुछ कम है
पास सबके यहाँ कोई न कोई गम है

साथ किसी के गुज़ारे थे कुछ लम्हें
सोचने बैठ जाऊं तो ये ज़िंदगी कम है

वो है हमारा या हम है उसके
मेरी  खुद  से ये जिरह हरदम है

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kahin ifraat to kahin kuchh kam hai
paas sabke yahaan koi na koi gam hai

saath kisi ke guzaare the kuchh lamhe
sochne baith jaao to ye zindahi kam hai

wo hai hamara ya ham hai uske
meri khud se ye zirah hardam hai

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                   :: Gist in English ::

there could be plenty or less
but every one has some grief

the moments spend with someone
life would fall short if start recall those

is she mine or I belong to her ?
the debate is unending with self

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* इफरात ifraat = abundance, plenty

3 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut Khub....
    वो है हमारा या हम है उसके
    मेरी खुद से ये जिरह हरदम है....
    सोचने बैठ जाऊं तो ये ज़िंदगी कम है

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  2. अमित...............आप खूबसूरत लिखते हैं ........इसमें कोई दोराय नहीं है .आप को पढ़ने के बाद कुछ लिखा है.........
    किसी भी हार का मुझे कोई गिला नहीं होता
    सब सहा पर अब इश्क कि नाकामियां न दे


    कोई भी हो सवाल मुझे मुश्किल नहीं लगता
    बस अब तुझे पाने की राह में दुश्वारियां न दे


    तेरे अश्कों से भीगे खतों से मुझे डर लगता है
    मुझ पर अब रहम कर ऐसी निशानियां न दे



    वक्त न हो बेरहम की तेरे बिन जीना पड़े सीखना
    मोहब्बत की गली में खुदा ऐसी परेशानियां न दे



    जब तक तेरा-मेरा मिलन हमेशा को नहीं हो जाता
    कोई भी अगली नस्ल को हमारी कहानियां न दे

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  3. वाह अमित भाई, दिल खुश कर दिया...
    ~~~~ * ~~~~ * ~~~~
    कहीं इफरात है तो...
    अपने गमों पर हमको अब सुकूं आया,
    देख लिया जो भी है वो अपने गम से बेदम है..
    ~~~~ * ~~~~ * ~~~~
    साथ किसी के गुज़ारे थे...
    दिल को सुकूं मिला था भले थे वो चंद लम्हे,
    उन्ही चंद लम्हों से जिन्दगी आज भी रोशन है...
    ~~~~ * ~~~~ * ~~~~
    वो है हमारा या...
    बेसबब सा अब तो ये जिंदगानी का आलम है,
    न है कुछ तेरा-मेरा, दिल से दिल का संगम है..

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